S

वो पल भर में रिश्ते-नाते हमसे तोड़ लिया है।

वो पल भर में रिश्ते-नाते हमसे तोड़ लिया है
जिन्हें उम्र भर दिल में हमने साथ रखा है
छोड़ के इस जहां को किस जहां में बस गए
दिल में ख्वाहिश लाख लिए कहां चले गए
इस जुदाई ने पुरी तरह हमें झकझोर दिया है
वो पल भर में रिश्ते-नाते हमसे तोड़ लिया है।
तन्हा न जी पाएंगे हम वक्त के इस सितम से
ज़ी रहे थे अब तक तेरे ही धर्म-ओ-करम से
किस्मत ने हमसे वो भी सहारा छिन लिया है
वो पल भर में रिश्ते-नाते हमसे तोड़ लिया है।
ढुंढते ढुंढते उन्हें हम करीब मौत के आ गए
गुज़रे लम्हों को याद कर सपनों में खो गए
हमने भी इक उम्र हंसी खुशी का जिया है
वो पल भर में रिश्ते-नाते हमसे तोड़ लिया है।
उठाऊं मैं जाम-ए-गम या जाम-ए-जहर को
पहुंचाएगा कौन हाल-ए-दिल मेरे सनम को
मयकदों से हमने अब रिश्ता जोड़ लिया है
वो पल भर में रिश्ते-नाते हमसे तोड़ लिया है
जिन्हें उम्र भर दिल में हमने साथ रखा है।
©anuragrahi