वे नकाब से बेनकाब तब हो जाते है,
जब बीच समंदर में अकेले छोड़ जाते है,
तब हम वक़्त को अपने विरोध में बताते है,
लेकिन वक़्त नहीं बदलता बस लोग बदल जाते है,
उन नाम के रिश्तों का तो केवल नाम ही होता है,
भरोसा तो उस प्यार पे होता है,जिनके हम हक़दार होते है,
पर वे तो आधे रास्ते में ही साथ पूरा समझ के छोड़ देते है,
उस समय भी वक़्त नहीं बदलता बस लोग बदल जाते है,
उम्मीद करते है उनसे बहुत ज्यादा की,
और मिलता कम भी नहीं,
लेकिन देखो तो धोखा उन लोगों ने दिया,उन्हें दोष दो,
या फिर खुद गलती को स्वीकार करो,
पर हम तो वक़्त और नसीब जैसे शब्दों को कसूरवार ठहराते है,
पर याद रखना वक़्त नहीं बदलता बस लोग बदल जाते है,
हम कहते "वक़्त बुरा है",
और "नसीब हमारा अधूरा है",
पर वक़्त कहता प्रत्युत्तर में
मैं तो पहले भी वक़्त ही था,
और अब भी वक़्त ही हूँ,
बेनकाब तो वो लोग हुए थे,
जिन्हें तुम अपने शुभचिंतक समझ बैठे थे,
लेकिन मैं नहीं बदलता,बस लोग बदल जाते है,
.....Kanak Maheshwari
©kanak.art
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