S sgupta en July 23, 2025 व्रंदर आकाश गगन नभ और अम्बर, कैसा है ये समंदर ।चारों ओर है ब्रज पीताम्बर ,फिर भी लोगो मै है आडम्बर । समझ रहा सब कह ना पाए कुछ ,रहता सब दिल के अंदर । आकाश गगन नभ और अम्बर,कैसा है ये समंदर ।©sandeepgup