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व्रंदर

आकाश गगन नभ और अम्बर,
कैसा है ये समंदर ।
चारों ओर है ब्रज पीताम्बर ,
फिर भी लोगो मै है आडम्बर ।
समझ रहा सब कह ना पाए कुछ ,
रहता सब दिल के अंदर ।
आकाश गगन नभ और अम्बर,
कैसा है ये समंदर ।
©sandeepgup