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वस्ल की रात है और तू करीब आ ।

ऐ मेरे हबीब आ तू मेरे करीब आ,
आज वस्ल की रात है और तू करीब आ।
वर्षो बाद तुम आई हो मौज साथ तुम लाई हो,
ऐ मेरे मनमित आ और तू करीब आ।
अब तलक तूम जो मुझसे दूर थी,
न जाने किस जनम की वो भुल थी।
राग दिल के जग उठे जबसे झलक दिखाई हो,
ऐ मेरे दिल जीत आ और तू करीब आ,
है दो चार दिन की जिन्दगी मुझपर तूम रहम करो,
हूं आगोश में अब तेरे:इस दिल की पट्टी मरहम करो।
अब मुझसे क्यों शरमाई हो तू मेरी अंगड़ाई हो,
ऐ मेरे हबीब आ तू मेरे करीब आ,
आज वस्ल की रात है और तू करीब आ ।
©anuragrahi