चुसकर जमीनों को इंसानो ने कर दिया ताजे पानी का खात्मा
देखकर करतूतें हमारी रोती है फिर कुदरत की आत्मा
हर चीज से सम्पन्न करके दिया था हरा भरा देश उसने तो
क्या था क्या बना डाला देखो भारत का भेष हमने तो
हमने ही चीर डाला अपने हाथों से अपनी मां का आंचल है
जल है तो कल है
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©vikasgarg
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