मेरी जुबाँ से उसका ज़िक्र आम था.....
मेरे रोम रोम में उसी का नाम था .....
वो मेरी राधा मैं उसका श्याम था .....
फिर इतिहास का खुद को दोहराना भी जरुरी काम था.....
उस गाथा का बहुत नाम था......
मेरा किस्सा गुमनाम था......
मिल ना सके फिर हम.....
ना उस कहानी में ना इस किस्से में.....
'राधा के नसीब में श्याम था ......
©your_rohit
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