देखते हैं कब तलक गुजरेगा आंधी का सफर
क्या दिये में है ये कूवत झेल ले कायनाते कहर
हम सब हैं छोटे दिये से लौ हमारी रही फरफरा
डर है हमें कहीं रूक न जाए कितनों का सफर
जिंदगी तो मौत की अमानत है सब मानते हैं मगर
अपनी अमानत की तबाही कौन करता इस कदर
हौसले टूटे नहीं ........फासलों से हम रूठे नहीं
आँखों को देखने न देंगे अब और तबाही का मंजर
रूक ग्ए हैं कदम तो क्या..झुक ग्ई है नजर तो क्या
न्ई सुबह की न्ई किरण का इंतजार करते हर पहर
है भरोसा रब पे कायनात चलती जिनके ईशारे पर
होगी मेहरबानियां ..जिंदगी में फिर से होगी सहर
......अभय...6/4/20
©abhidilse
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