एक बार फिर मुलाकात होगी,
जहां प्यार के बीज बोए थे।
यादों को फूलों के धागों में पिरोया था,
हमारी मोहब्बत का गवाह ये चांद तारे बने थे।
वक्त को हमने समंदर की लहरों के साथ बिताया था,
नीले आसमान यह के नीचे दर्द को बारिश की छुअन से दुर किया था।
दुनिया से अनजान रहते थे,
पर अब सब कुछ बदल गया।
हम दोनों बंट चुके हैं,
अलग अलग हिस्सों में।
ये दिल विरान बन चुका है,
आंसु की एक लकीर बन गई है।
ये मेरे काले गढ़े उम्मीद की लहर ढुंढ रहे हैं।
ये मेरे अमावस्या के सपने पूनम होने का इंतजार कर रहा है।
©urvi13
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