रह-रहकर कांटे चुभाती हैं यादें
चुभाकर हृदय को दुखाती हैं यादें ।
यादों का नशा किसी मदिरा से कम नहीं
दिल में किसी को याद करना बुरा तो नहीं
कभी दुख तो, कभी सुख
कभी विजय तो, कभी हार
कभी हर्ष तो, कभी सित्कार
क्रम-क्रम से कड़ियां दिखाती हैं यादें
हंसना और रोना सिखाती हैं यादें
सच तो ये है साहिब
दिल के कोने में रहती है यादें
जगाती है हमको, सुलाती है यादें
रुलाती है हमको, हंसाती है हमको
अपनों सी बनकर सताती हैं यादें
अकेले में अक्सर रुलाती हैं यादें।
©ranjan
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