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यादों के सहारे जिंदगी।

मेरा रहगुज़र है ये सूरत दिल में मैं उतार लू
तुझे खोने का कोई गम न हो पलकों में संवार लू।
मेरा अंग अंग महक उठे वादिया चहक उठे
तू चांद की है चांदनी मैं चांदनी पसार लू।
मुझे भी ये मालूम नहीं कि क्यों मिली थी तू मूझे
सपनों में ही अब बसी रहो तो मैं जिंदगी गुजार लू।
हाले दिल का क्या कहे तू हाले दिल से बेख़बर नहीं
हमसफर जब न हो कोई तो कैसे वादियों से बहार लू।
कैसे दिन बित रहा कैसे रातें बित रही कोई खबर नहीं
रात दिन तुझे याद कर हर याद को गुजार लू।
©anuragrahi