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ये बारिशें...

मुझे कोई बताए क्या कह रही हवाऐं,
हल्की हल्की ठंडी सी छाई घटाए
जो बहते बहते चुपके से दिल को भर दे जज्बातो से।
क्यूं मेरी बेचैन रूह को आता है करार,
जब ये बूंदो की आसमा से हो फुहार।
मेरे साथ कैसी ये साज़िश कर रही है बारिशें,
दिल सोचता है जाने कब पूरी होंगी हमारी ख्वाहिशे...।
©piku