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ये बात उन दिनों की हैं ...

लड़ते थे ,झगड़ते थे फिर भी कितने दोस्त पक्के थे हम
ये बात उन दिनों की हैं जब कभी बच्चे थे हम।
याद हैं मुझे ......
4 बजते ही सब का मेरे घर पर आना
चिंटू चिंटू आवाज़ लगाना और बाबा के शाहपुरा जाते ही खुश हो जाना।

बाबा शाहपुरा जाने के बाद....
फिर हम सब मिलकर एक ओर एतिहाशिक दिन रचते थे खूब खेलते थे ,खूब लड़ते थे,खूब झगड़ते थे ।....
आओ तुमको एक-एक कर मेरे यारो से मिलवाता हूँ
तुम्हे भी तुम्हारे यारो की याद दिलवाता हूँ।
1- निक्की को सब वैध जी कहकर बुलाते थे ,थोड़ी गलती होने पर बहुत कुछ सुनाते थे ।
2- ओमप्रकाश भी गुरूजी कहने पर सुन तो लेता था ,लेकिन इसके बाद बहुत (***)देता था ।
3- केशव ,माधव भी दो भाई थे करते एकदुसरे से बहुत लड़ाई थे।
4- हम सब में कालू सबसे निराला था थोड़ा गूशालु थोड़ा भोला भाला था ।
हम यार यु ही साथ हस्ते गये ,चलते गये ,बढ़ते गये
फिर इस जिंदगी की दौड़ में हम एकदुसरे से बिछड़ते गए ।
आज मैंने बचपन की उन हटकेलियो को संजोया हैं
अपने मन की यादो को शब्दों में पिरोया हैं।
कल जब कॉलेज की छुटि है तो मैने आज की रात बचपन की यारी को तराशा हैं।(love u...keshav ,madhav ,kalu ,op ,nikki ,banti....)
तुम्हारा यार ----- 'हर्ष'
©harshgoyal