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ये भी एक अनहोनी थी

ये भी एक अनहोनी थी

ये भी एक अनहोनी थी

जो होनी थी, और होनी ही थी

वरना राधा कृष्ण की थी

फिर कृष्ण से दूरी कैसी थी

युग का पालनहार, सर्वसमर्थ होकर

उससे उसकी चाहत दूर होनी थी

ये भी एक अनहोनी थी

जो होनी थी, और होनी ही थी

वो चाहता तो क्या जाने देता

अपने प्रेम को यूँ ही

वो चाहता तो क्या आने देता

रुक्मिणी को निकट भी

पर ये भी एक विधि थी

जो घटनी थी, और घटनी ही थी

जब वो परमात्मा होकर

दूर हो गया अपनी प्रिया से

मैं फिर किस खेत की मूली थी

मैं कैसे ये बात भूली थी

ये भी एक दुर्घटना थी

जो होनी थी, और होनी ही थी

क्या शिकायत करूँ तुझसे

जब किस्मत राधा सी पाई है

क्यों बहाऊ आँसू मैं

जब प्रीत उस सी लगाई है

तू कृष्ण बन गया

मैं बनी राधा रानी थी

तेरे साथ पूरी प्रजा

मैंने गुमनामी पाई थी

ये भी एक अनहोनी थी

जो होनी थी, और होनी ही थी