ये भी एक शिकायत हैँ तुमसे
ये भी एक शिकायत है तुमसे
जब याद तुम्हारी बहुत आती है ,
मन करता है तुम्हे फ़ोन करू ,तुमसे बातें करू।
पर तुम इतना busy होते हो की फ़ोन तो क्या ,
एक msg भी नहीं कर पाते हो।
तब आँख मेरी भर आती है,
मायूसी छा जाती है।
मन करता है काश तुम सामने हो,
और तुम्हारे ही गले लगकर तुमसे तुम्हारी ही शिकायत करु।
ये भी एक शिकायत है तुमसे क्यूँ तुम सामने नहीं आते हो?
कहु .. क्यों सताते हो मुझे इतना ,
जब बात नहीं करनी तो क्यू याद आते हो इतना। मैं भी तो चाहती हुँ की भूल जाऊ कुछ देर तुम्हे ,
पर तुम हो की और ज्यादा याद आते हो।
कोई तो जगह कोई तो वक़्त बताओ ऐसा ,
जब तुम मुझसे मेरी याद से दूर जाते हो।
ये भी एक शिकायत है तुमसे की इतना क्यू मुझे याद आते हो?
जब भी बात होती है अपनी तुम भोलेपन से जान पुकारते हो ,
मुझे कभी शायरी कभी चुटकुले सुनते हो।
केसा है मेरा बच्चा , कहकर बहलाते हो।
मैं सारा गुस्सा भूल जाती हुँ ,सारी शिकायतें भूल जाती हुँ,
बोल ही नहीं पाती जो कहना चाहती हुँ।
ये भी एक शिकायत है तुमसे क्यूँ सारी शिकायते भुला जाते हो?
कभी कभी सोचती हुँ कितनी खुश नसीब हुँ कि मुझे तुम मिले हो ,
कोई नहीं दुनिया मे ऐसा तुम इतने अच्छे हो।
लगता है डर कहीं खो ना दू ,तुम दिल के इतने सच्चे हो, छुट गया अगर साथ ये , कौन संभालेगा इस दिल को।।
ये भी एक शिकायत है तुमसे , जीवन मे इतना देर से आये हो?
जब देर रात को बात होती है अपनी कई दिनों बाद ,
लगता है तुम पास ही हो।
मैं पास तुम्हे बुलाती हुँ और कान मे तुमसे कहती हुँ,
नहीं रह सकती मैं तुम्हारे बिना ,मुझे कभी छोड़कर मत जाना।
तुम धीरे से कहते हो मैं हु ना ,
तेरे पास रहूँगा सदा जाना।।
ये भी एक शिकायत है तुमसे की क्यूँ इतना मेरे करीब आते हो?
मैं तुमसे बस इतना कहती हुँ माना की वक़्त कम होता है तुम्हारे पास,
पर हफ्ते मे एक दिन तो कर सकते है दिल खोलकर बात।
मैं तुमसे बहुत सारी बातें कहना चाहती हुँ,
जो अक्सर खुद से कहती रहती हुँ ।
तन्हाई मे तुम्हे महसूस करती हुँ ,
दीवार पर तुम्हे हँसते हुए देखती हुँ ।
ये भी एक शिकायत है तुमसे क्यूँ इतना मुझे सताते हो?
देखती हुँ आइना जब भी ,मैं सामने तुम्हे पाती हुँ,
तुम बस एक टक देखते रहते हो मुझे,
मैं अपनी नज़रे झुका लेती हुँ।
फिर जब उठाती हुँ पलके तुम मुस्कुराते हो,
प्यारी लग रही हो बस ये कह कर गायब हो जाते हो।
यादो मे तो ठहर जाया करो ,
कभी तो गले लगाया करो। ये भी एक शिकायत है तुमसे क्यूँ आँख मिचोली खेलते हो?
बेसब्री से है मुझे उस दिन का इंतज़ार जब मिलेंगे हम।
सोचा है बहुत सी बातें तुमसे करुँगी ,
जो सोचा है मेने सब कह डालूंगी।
पर जानती हु खुद को सिर्फ देखती तुम्हे रह जाउंगी ,
कुछ ना बोल पाऊँगी।
पर क्या सच मे देख भी पाऊँगी मैं तुम्हे नज़रे उठाकर ,
क्योंकि जानती हु तुम मुझे ही देख रहे होंगे लगातार।
ये भी एक शिकायत है तुमसे ,मुझे ऐसे क्यूँ लजाते हो?
क्यों ऐसा बना दिया मुझे की तुमसे मिलने को तरसती हुँ ,
तुम्हे देखने को तड़पती हुँ।
तुमसे बात करने को मचलती हुँ।
फिर कुछ क्यू ना बोल पाऊँगी तुमसे?
क्यों तुम इतने अच्छे हो की प्यार बस प्यार करने का दिल करता है तुमसे?
क्यों कुछ शिकायत नहीं कर पाऊँगी तुमसे?
ये भी एक शिकायत है तुमसे???
✍️शिवन्या
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