ये चांदनी भी मेरे लिए हैं अमावस की तरह क्या करें
गुजारिश है खैर-खैरियत के लिए मेरे रफिक दुआ करें।
मेरे दिलो-दिमाग पर गम का ताबिस है चढा हुआ
इस इलाज-ए-जख्म का नुस्खा कोई ढुंढा करें।
तर्क-ए-तालुकात जो हुई मौसम तन्हाई का आया
मेरी तरह न और कोई इस बरसात में भिंगा करें।
कौन अपना कौन पराया है पहचानूं तजुर्बात नहीं
मेरी तरफ न निगाह-ए-नाज़ से अब देखा करें।
ऐसा खौफ है अनुराग के जेहन में फिराक का,कि
दिल टुटे तो टुटे मगर फिर यार से न रूठा करें।
©anuragrahi
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