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ये चेहरा.. ✍

दुसरों को पाने के
लिये मैंने खुद को ही
खो दिया, आज
समझ आया मैंने
क्या खो दिया,
दुसरों के साथ
चलते- चलते मैंने
अपना ही साथ छोड़
दिया, आज समझ
आया मैं इतना अकेला
क्यों हो गया,
झुठी हंसी खोजते- खोजते
मैं अपनी हंसी ही भुल गया,
आज समझ आया ये चेहरा
मुझ से नाराज क्यों हो गया..
©banirai