बड़ी मस्त है उसकी निगाहें-उगाहें, होंठ-ओठ,
अदन-बदन, जुल्फे -उल्फे सब,
तड़पते है सभी उसपर बुढे-उढे, अच्चे-बच्चे,
आगल-पागल, आशिक-वाशिक सब।
जिस दिन से मिला हुं मैं छोड़ दिया चाचा-चाची,
दादा-दादी, भाई-बहन, बेटा-बेटी ,घर-द्वार सब।
©anuragrahi
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