N

ये दुनियाँ...

कई रातों से हम सोये नहीं,
अब बंद करना चाहते है आँखे,
इस मतलब कि दुनिया में,
न फिर कभी भुलकर खुल जाए।।
रातें बन गयी हैं बेवफ़ा,
दुनिया जो बातें करती हैं वफ़ा की,
शक्ल बिगाड दी इन्सानियत की,
जो दुनिया बडी जालीम हैं।।
बस एक दुआ कबूल हो दिल से,
मौत हो मेरी और मैय्यत पर न कोई आए,
और न सहा जाए न सुना जाए,
जो दुनिया के कानून बडे गजब ढा रहे है,
एक ख़ुशी मांगते हम सहस्र दुख थमा दिए।।
- निलेश इंगोले
©