ये दूरियाँ
ये दूरियाँ एक दिन मेरी रूह को खामोश कर देंगी,
तुम्हें वक़्त नहीं मिलता… और मेरे दिल को सब्र आता ही नहीं
।
दिन तो किसी तरह दुनिया की भीड़ में कट जाते हैं,
मगर रातें… तेरी यादों के अंधेरे में दम तोड़ती हैं
इन आँखों ने तेरे बिना सोना सीखा ही नहीं,
ये हर रात तेरे इंतज़ार में जागती रहती हैं,
जैसे चाँद भी तेरे लौट आने की खबर लाएगा।
हर आहट पर दिल यूँ धड़क उठता है
जैसे किस्मत ने इस बार तुझे मेरी दहलीज़ तक भेज दिया हो…
मगर जब दरवाज़ा फिर भी खामोश रहता है,
तो ये आँखें टूटकर बरस जाती हैं,
और हर आँसू तेरे नाम की कहानी लिख जाता है।
तू शायद कभी समझ नहीं पाएगा,
कि किसी को इतनी शिद्दत से चाहना
कैसा दर्द देता है।
मैंने तुझे माँगा भी नहीं था खुदा से,
फिर भी तू मेरी हर दुआ बन गया…
और अब तू ही मेरी सबसे बड़ी कमी बन गया है।
सच कहूँ,
मोहब्बत ने मुझे बर्बाद नहीं किया…
बस तेरे बिना जीने की हिम्मत छीन ली।
अब तो हाल ये है कि
अगर तू लौट आए…
तो शायद ये दिल फिर से धड़कना सीख जाए,
वरना ये दूरियाँ सच में
एक दिन मेरी जान ले जाएँगी।
-शिवन्या
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