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ये है हाल मेरे तन का।।

मत टकरा मेरे संकल्प की लहरों से,
मेरे मन की समुन्द्र बहोत गहरी है,
और किनारे का कोई पता नहीं,
और दिल में भी आजतक कोई टीका नहीं।
©sochamit