ये इश्क़ ये प्यार ये मुहब्बत का सफर छोड़ जाउंगा
मैं इक दिन ये तेरा रौशन शहर छोड़ जाउंगा ।
मेरे दोस्त मेरी शान ओ सौकत ये घर अजिज है मगर
मैं अपना सारा समान जयादाद इधर छोड़ जाउंगा।
तुने मुझे अपने आप से छुड़ा लिया शायद
मैं अपने होने का तेरे दिल में असर छोड़ जाउंगा।
तू मेरे गर्दिश-ए-तकदीर पर इतना मायुस न हो
वादा रहा तेरे लिए खुबसुरत सहर छोड़ जाउंगा ।
मैं जिने के लिए फकत तेरा साथ मांगा था पर नहीं
मैं तेरे लिए तेरे मुराद का राहगुज़र छोड़ जाउंगा।
अब डुबने जा रहा है अनुराग कयामत की दरिया में
तुम देखते रहना मैं वहां भंवर छोड़ जाउंगा।
©anuragrahi
S