ये जिंदगी का सफ़र और आसां हो जाएंगे
आप गर साथ क़दम क़दम चलते जाएंगे।
मैं इस राह में थक कर बैठ गया हूं मगर
आप अगर मुझे हाथ दे उठ खड़ा हो जाएंगे।
इश्क़ का ये रोग लगा कर अब जा रही हो कहां
लौट कर तो चली आ वगरना हम मर जाएंगे।
ये उम्र भी अभी है पहाड़ जैसी मरहले जिंदगी की
सामने गर फकत बैठी रहोगी तो उम्र भी कट जाएंगे।
चार कदम पे मौत है मगर हमें उसका क्या खबर
रोते हंसते ही शाय़द इक दिन हम भी गुज़र जाएंगे।
ये जमाना रोएगा तुझे याद कर कर के अनुराग
हम मुहब्बत में इस कदर खुद को भुला जाएंगे।
©anuragrahi
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