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ये किस जन्म का शाप है ये किस कर्म का बबूर है।

ये किस जन्म का शाप है ये किस कर्म का बबूर है।

ये किस जन्म का शाप है ये किस कर्म का बबूर है

मेरे पास जो है पोटली बस कुसूर ही कुसूर है

यहां के लोग बहुत चाक है और बेदाग यहां चांद भी

ऐ जिन्दगी कहीं और चल यहां अलग ही दस्तूर है

अभी कई रात है तुझे जागना अभी और तेज है भागना

कहीं शाम ढल न जाए यहां मंजिल तेरा अभी दूर है

गए किस चमन की तलाश में इस बाग के सब भंवरें

ये खिज़ा का कोई इंतकाम है ये शाम आज़ बेनूर है

अब बख़्श दो गर बेकसूर हूं कोई खोट है तो मार दो

जी चाहे जो सज़ा दो बाखुदा अनुराग को मंजूर है।