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ये रूहानी बातें ये सुहानी फिजाएं किस काम के।

ये रूहानी बातें ये सुहानी फिजाएं किस काम के।

क्या इतना करीब आता है कोई

क्या इस क़दर अपना बनाता है कोई

मुझे तो किसी से अपनेपन का अहसास नहीं

क्या मुझे भी अपना बताता है कोई

दफ़ा-ए-प्यार में मुझे बेवफा क़रार दिया गया

क्या इस नाचीज़ से वफ़ा निभाता है कोई

मैं रो देता हूं इसलिए अब तुझे याद नहीं करता

क्या तुझे भी मेरी यादें रूलाता है कोई

ये रूहानी बातें ये सुहानी फिजाएं किस काम के

क्या अनुराग से कभी मिलने आता है कोई।