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ये शहर हमें छोड़कर जाना भी नहीं था

ये शहर हमें छोड़कर जाना भी नहीं था,
उसके शहर में अपना ठिकाना भी नहीं था।।
मालूम था, वो छोड़कर जायेगा एक दिन,
और लौटकर वापिस उसे आना भी नहीं था।।
हम मुफ़लिसों के पास थी बस प्यार की दौलत,
कोई और अपने पास खज़ाना भी नहीं था।।
वो आज हमको ब़े-वफ़ा कहता है तो कहे !
इसका बुरा हमनें कभी माना भी नहीं था।।
हमने तब भी उसके नाज़ उठाये,
जब घर में खानें के लिए दाना भी नहीं था।।
©maahisingh