ये तन्हाई किस शब-ए-वस्ल की ख्वाब देखता है।
दरम्यां उसके और मेरे गलतफहमी रह गई
शाख-ए-इश्क पर मुहब्बत टंगी रह गई,
कैसे कहूं कि चाक नहीं है गीरेबां उनका
मेरे दामन में भी बहुत कुछ कमी रह गई,
बिछड़ कर वो भी नहीं जी पाएंगे मेरी तरह
मेरे लिए अब भी उनके आंखों में नमी रह गई,
ये तन्हाई किस शब-ए-वस्ल की ख्वाब देखता है
फासला तो हम दोनों में बनी की बनी रह गई,
सितम तो ये है जंग-ए-जुबां बेतुके सवाल पर
अनुराग और यार-ए-अनुराग में ठनी रह गई।