नजरों को ओट कर दे ढक ले अपने चेहरे को,
यूं ही ना भटक गलियों में यह समय कातिलाना है,
साये मौत के मंडरा रहे वहां जहां लोग घुल-मिल रहे,
श्रद्धांजलियां जहाँ-तहाँ यह समय कातिलाना है,
अकेले ही भाग चल तू एकांत में रहना ही भला,
बड़ा नाजुक दौर समझ ले यह समय कातिलाना है,
हवा का रुख बदलेगा अव्यक्त वक्त लगेगा उसमें कुछ और,
धैर्य धर ले इंतजार कर यह समय कातिलाना है ।
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©vikasgarg
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