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यहाँ अकेला मै ही गुन्हेगार तो नहीं......!

दीवाना हूँ तेरा मुझे इंकार तो नही,
कैसे मैं कह दूँ मुझे प्यार नही,
कुछ शरारत तो तेरी निगाहों की भी थी,
मैं अकेला इसका गुनहा गार तो नही।

©rohit123