यमुना पुकारे
कान्हा तुझको यमुना पुकारे
आ जाओ फिर तुम मेरे तीरे।
देखो लो कैसा हाल हुआ है,
यमुना तेरा बेहाल हुआ है।
शहर का सारा कचरा गिरे
आ जाओ फिर तुम मेरे तीरे।
नहीं बहती है अविरल धारा,
चढ़ा आवरण कचरा सारा।
साँसे चलती अब धीरे-धीरे,
आ जाओ फिर तुम मेरे तीरे।
पहले तो बस था मैं काला,
जब से मिला है गंदा नाला।
महकने लगा हूँ मैं तीरे-तीरे,
आ जाओ फिर तुम मेरे तीरे।
खूब करते थे तुम जलक्रीड़ा
अब तो जल में है बस कीड़ा।
सड़ने लगा हूँ मैं अब धीरे-धीरे,
आ जाओ फिर तुम मेरे तीरे।
नहीं आती है अब गैया तोरी
छोड़ गयी है अब मैया मोरी।
आँसू बहती है तो नीरे-नीरे,
आ जाओ फिर तुम मेरे तीरे।
खत्म हुई क्या तेरी माया,
जीर्ण-शीर्ण सी मेरी काया।
मरने लगा हूँ मैं अब धीरे-धीरे
आ जाओ फिर तुम मेरे तीरे।
आकर बेड़ा पार करो तुम
फिर मेरा उद्धार करो तुम।
मानव से मन अब मेरा हारे,
सब कुछ अब है हाथ तुम्हारे।
कान्हा तुझको यमुना पुकारे
आ जाओ फिर तुम मेरे तीरे।
©पंकज प्रियम
26जुलाई2019
©pbpriyam
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