यूं ही बोल दिया तुमने कि इश्क हुआ है हमसे
तो क्यू छोड़ दिया साथ बीच मझदार में
खड़े थे जब इश्क के तूफान में
धड़कनों में बसा होता अगर मैं तुम्हारी
तो महसूस होता तुमको
कि मैं कितना बेताब हूं
यूं ही बोल दिया तुमने कि दिल में बसे हो तुम
तो मेरे ठहर जाने से
क्यों ना रुकी धड़कनें होले से
रगों में बहता होता अगर मैं तुम्हारी
तो महसूस होता तुमको
कि मैं कितना बेसब्र हूं
यूं ही बोल दिया तुमने कि आंखो में बसे हो तुम
तो आंसुओं के पानी से ऐहसास
क्यों ना हुआ मेरा तेरे गालों पर
सोचती हो अगर हमेशा तुम मेरे बारे में ही
तो पास होने पर भी मेरे
दूर क्यों ना होती
सिकन यह ललाट से तेरे
यूं ही बोल दिया तुमने जिंदगी में सिर्फ मैं ही हूं तुम्हारी
तो क्यों रात को सोने के बाद मेरे
रहती online 12:00 बजे तक तुम हो
अगर मैं ही जिंदगी होता तुम्हारी तो
तन्हा शाम को छोड़ते ना मुझे और
खटखटाने क्यों पड़ते दरवाजे गैरों के तुझे
©shree8107
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