अंधेरों से डरना कैसा.... सवेरा फिर होना है...
यह जिंदगी की कस्ती है.....कभी हसना कभी रोना है....
टूटती हुई इन लड़ियो में फिर से मोती पिरोना है......
अपना कुछ भी नहीं यहां.... तो फिर क्या पाना क्या खोना है....
चार पल की ज़िन्दगी है..... फिर किस बात का रोना है....
©ankita_28
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