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गम ए जिन्दगी

हम उनके पहलू से लगकर चलते थे
कभी उनके टालने से टलते थे।
मैं भी उसी तरह बहलता था यारों
और जिस तरह से बहलते थे।
वो थी जान कभी हर एक महफिल की
हम भी घर से अब कम निकलते हैं।
अब क्या तकलुफ करे ये कहने में
जो भी खुश हैं हम उनसे जलते हैं।
©anuragrahi