P piksa hi 23 जुलाई 2025 आ भी जा.. वो सुबह का सवेरा... महकती बेलाजिंदगी की राह में..कोई साथी, कोई अकेला वो ठण्डी हवा.. वो बहकती फिज़ा..आ भी जा..अब तू आ भी जा.... ©piksa