जी लें कुछ पल अब अपने लिए,
चलो, फिर से मासूम बच्चे बन जाएं।
भूल जाएं 'अपने और पराए' का भेद,
बस अपनी ही धुन में खो जाएं।
जहां न कल की फिक्र हो, न आज का रोना,
न मुकाम पाने की दौड़, न कुछ खोने का डर हो।…
जल्दी उठने की आदत डाल लो, अगले घर जाना है,
सलीके से खाना बनाना सीखो, वहाँ सबको रिझाना है।
लड़कियों की तरह रहना सीखो, यूँ आज़ाद परिंदा न बनो,
कम बात किया करो गैरों से, अपने ही घर में शर्मिंदा न बनो।"
रो…