क्यों,ये दर्द??
क्यों,ये उम्मीद??
क्यों,ये हसरतें
क्यों मैं?
क्यों हम?
क्यों यह दुनिया?
जीवन की पहली ख्वाहिश
जीने की अंतिम मंजिलें,
कहाँ खो जाती है?
क्यों बस रह जाती हैं
थोड़ी-सी स्मृतियाँ और थोड़ा सी यादें
यहाँ-वहाँ बिखरा हुआ??
और कुछ भी नहीं रहेगा इस संसार में,
न हम सब , और न मैं??