जी लें कुछ पल अब अपने लिए,
चलो, फिर से मासूम बच्चे बन जाएं।
भूल जाएं 'अपने और पराए' का भेद,
बस अपनी ही धुन में खो जाएं।
जहां न कल की फिक्र हो, न आज का रोना,
न मुकाम पाने की दौड़, न कुछ खोने का डर हो।
न हो ये दुनियादारी, न कोई मुकाबला किसी से,
बस एक खिलौना पाने की ज़िद और सुकून का घर हो।
चलो छोड़ दें इस समझदारी का भारी बस्ता,
और फिर से वो बेफिक्र बचपन जी आएं...
हंसें तो बस दिल से हंसें,
चलो, फिर से हम बच्चे बन जाएं।
💞Sona 💞
S