आदत मेरी बुरी हो गयी है,हर चीज से दूरी हो गयी है,
ये भला कैसा रिश्ता हुआ, हर चीज तुम्हारी हो गयी है,
अब बताओ मिलना कब है,
बात तो वैसे सारी हो गयी है,
आ रहा हूँ कल तेरे पास,
सफर की तैयारी हो गयी है,
कल भूखे को खाना खिलाया था,
आज बरकत से जेब भारी हो रही है,
उनके दिए फूलो का जादू देखो,
हर तरफ खुशबुदारी हो गयी है,
सूझता नही और कुछ भी मुझे,
ये कौन सी बीमारी हो गयी है।
©rkkaushik
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