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आइने में जो चेहरा दिखता है, वो मेरा ही एक राज़ है, पर हर मुस्कान के पीछे छुपा…

आइने में जो चेहरा दिखता है, वो मेरा ही एक राज़ है,
पर हर मुस्कान के पीछे छुपा एक अनकहा सा साज़ है।
नज़रें मिलती हैं खुद से, तो सवाल कई उठ जाते हैं,
खामोशी में भी जैसे दिल के सारे जज़्बात गुनगुनाते हैं।
जो दिख रहा है सामने, वो पूरा सच तो नहीं होता,
हर प्रतिबिंब के पीछे भी एक अधूरा सा ख्वाब होता।
आईना सिर्फ सूरत दिखाता है, दिल की गहराई नहीं,
वरना हर झलक में दिखती मेरी असली परछाई यहीं।