कल हारे थे
आज फिर हार गए
अपनों के इस जंग में
अपनों से ही हार गए
जो उमींद की आशा हुआ करते थे
आज निराशा की वजह बन गए
जिनसे हर वक़्त प्यार किया ....
इज्जत दिया ....
उन्होनें हमे खिलौना ही समझ लिया
जब जी किया तो खेल लिया....
फिर अकेला कहीं छोड़ दिया ....
©sonamsinha
S