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आज़ादी

आज़ादी
दो शब्दों के कहने से,
आजादी नहीं मिली होगी।

बहुओं की सेज उजड़ी होगी
भाइयों की लाश सड़ी होगी।
झांसी के मैदानों में ,
महारानी जंग लड़ी होगी।
भगत सिंह की सेना में ,
धन की कमी पड़ी होगी।

दो शब्दों के कहने से,
आजादी नहीं मिली होगी।

ऊधम सिंह ने उधम मचाया ,
नालों रक्त बहा होगा।
सुखदेव की फांसी पर ,
मां ने भी खूब आशु बहाई होगी ।
भारत के टुकड़े हों पहले,
जिन्ना साहब की भी नजर होगी।

दो शब्दों के कहने से ,
आजादी नहीं मिली होगी।

गांधी की कमर झुकी होगी,
लाल-बाल-पाल की सभा रुकी होगी।
राजगुरु को बली हुई ,
आजाद को भी गोली लगी होगी।
मेरे वतन के दरिंदों ने,
टेडी चाल चली होगी।
जलियांवाला कांड हुआ जब,
कितनी गिर्वा कटी होगी।

दो शब्दों के कहने से ,
आजादी नहीं मिली होगी।
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