D

आंसूओं के बूंद

मेरे ये आंसूओं के बूंद
तुम्हारी हरकतों का मोहताज है
कितना भी चाहूं रोकने का
ये तो अपनी मर्जी के सरताज है......(2)
बड़ी शिद्दत से चाहा था तुझे,
नहीं पाके भी खोया है तुझे
जाने किस सफर में मुझे,
तूने ठुकराया था मुझे
तमन्ना मान के चाहा था तुझे
फिर भी तूने माना न मुझे.....
मेरे ये आंसूओं के बूंद
तुम्हारी हरकतों का मोहताज है
कितना भी चाहूं रोकने का
ये तो अपनी मर्जी के सरताज है......(2)
_Durga(Diya)
©diyadeepak