आशाएँ, दिल की गहराई में बसतीं,
भविष्य संग चलने की रश्में कसतीं।
उम्मीदों के दीये, अंधेरों में जलते,
सपनों के संग, नई राहें खुलते।
कभी बादलों में छुप जाए सूरज,
तो कभी बरसात में भीगे मंजूरज।
आशा की डोर, हमें बांधे रखती,
निराशा के सागर में, नैया पार लगती।
भविष्य, एक अनचीन्हा आयाम,
हर दिन, लेकर आता नया पैगाम।
आशा के संग जब कदम मिलाते हैं,
सपनों के महल, हकीकत में बनाते हैं।
एक दिन ऐसा भी आएगा,
अंधेरा छटेगा, सूरज लौटेगा।
आशा और भविष्य, संग गाएंगे,
नई राहों पर, हमें बढ़ाएंगे।