कितना अजीब हो तुम!
जितना भी देखु कभी पुराना होते ही नहीं हो,
कभी तुमको देखने की चाहत घटने ही नहीं देते हो,
पर ऐसा है ही क्या तुममें?
ओ ही तो एक ही नीला बदन,
और फिर कभी कभी थोड़ा काला भी पर जाते हो।
पर ऐसा है ही क्या तुममें
जो हर बार पहली बार का अहसास दिलाता है,
जो बार बार तुम्हे देखने को मजबूर करके है,
पाता नई! बस यही चाहती हु के
हर रिश्ते मे एक इंसान दूसरे के लिए तुम जैसे हो,
और कोई रिश्ता कभी पुराना ना हो जाये... बस!!
©anasuya
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