आते ही नाम मेरा रोकर वो मुस्कुराया देर तक,
काँपते हाथों से रुलाकर हँस न पाया देर तक।
रात के मुजरिम को भूलना चाहा दामन बचा के,
गवाहे-सफ़ में खड़ा और वो याद आया देर तक।
सफ़ - कतार
सामने वो मिरे भूखे बच्चों की तसल्ली के लिये,
रास्तों की हसरत से फिर पानी पकाया देर तक।
झूटों की मंज़िल पे धूप रहती है ना साया देर तक,
सच तलाश पे गुनगुनाते इक फ़क़ीर आया देर तक।
©rashmi94
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