हकीकत से रुबरु हो सु चुके हैं
अब कोई ख्वाब सजाना नहीं है..
बहुत की है गलतियां पहले
अब उन्हें दोहराना नहीं है..
दोस्त बने चाहे दुश्मन
अब किसी से से घबराना नहीं है..
जो समझे मुझे वो ठीक
अब किसी को समझना नहीं है...
जो लोग पीछे छूट गए
अब उनको मनाना नहीं है ...
अब समझ गए हैं वजूद अपना
दूसरों के लिए खुद को मिटाना नहीं....
✍🏻त्रिलोक सिंह गिलाकोर
©trilok
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