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अब फर्क नहीं पड़ता

अब फर्क नहीं पड़ता
क्या पाया क्या खोया
जो बोया, क्या मिल पाया?
ना शौख रहा जीत का
ना खौफ रहा हार का
ना तारीफों से सुकूँ मिला
ना बेज़्ज़ती का गम हुआ
ना वो रूहदारि किसी से रह गयी
ना नफरत किसी से खास हुआ
अब दुनिया, दुनिया वालों से ना अखड़ता
हाँ मुझे अब कुछ खास फर्क नहीं पड़ता
मुझे अब फर्क नहीं पड़ता।।
©amour_anu