अगर तुम मुझे न समझते समय की बर्बादी।
लम्हों की बहुत सारी किताबें होती हमारी।।
सच बताऊं जिक्र तुम्हारा जब भी होता।
मेरे लफ्ज़ो पर हमसफ़र तुम्हारे लिए सदा होता।।
पर क्या करे तुम्हारे लिए ख्वाबों का होना गुनाह था।
तुम पर भरोसा करना मेरे लिए भी गुनाह था।।
फ़रिश्ता समझकर तुमसे उमीदें की थी...
उम्मीदों की भी हदें पार करना कोई मुझसे सीखें।
गम मिलने पर भी माफ़ करना कोई मुझसे सीखें।।
चंद अलफ़ाज़ अब जुबान पर रह गए हैं मेरे।
कैसे सोच लिए तुमने कि ये पूरा कर पाएंगे प्यार को हमारे?
अधूरी ही रह जाएगी बनकर सिर्फ जुबानी हमारी कहानी।।
©dreamgirl
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