D

अधूरी दास्ताँ

कहती हो तुम कि मेरी यादों में उलझी रहती हो
हां... तो अक्सर उलझा रहता हूं मैं भी तुम्हारे यादों में
आज भी उलझा हूँ बीते वक़्त को सुलझाने में
जिस तरह सुलझाया करता था तुम्हारी जुल्फों को अपनी उंगलियों से
घरवालों के खातिर हम अलग तो हुए थे
पर मालूम नहीं कि सही थे या गलत थे
पर जैसे लहरें समुन्दर से लाख चाहने पर भी जुदा नहीं होती
वैसे ही तुम भी दूर होकर भी पास हुआ करती थी
जुदाई के वक़्त मैं भी मजबूर था
तुमने जो कह दिया था इसलिए क़ुबूल था
वरना तो दस्तूर-ए-इश्क़ मैं युहीं बदल देता
अश्क तो आँखों से मैं भी न रोक पाया हूं
कही रातें उन हसीं लम्हों को याद करके बिताया हूँ
इस प्रश्न का जवाब मैं लब्जो में कैसे दूँ?
यक़ीनन तुम्हारी बातों का मेरे पास जवाब नहीं है
बस इतना जान लो कि तुम्हारे लिए मोहब्बत आज भी बेशुमार है
इसलिए सोचा हमसफ़र न सही कम से कम दोस्त बनकर एक दूसरे का साथ निभाएंगे
अगर तुमने दबा दिए हैं अहसास अपने तो यकीनन तुम्हारे लिए मैं भी दबा सकता हूँ
हमारे इश्क़ को दोस्ती का नाम देकर जीवनभर तुम्हारे लिए सीमा को बरकरार रख सकता हूँ
पर सुना है सच्ची मोहब्बत बहत कम के नसीब में होती है
शायद हमारे हाथों में ये लकीर ही नहीं है
लाखों दुआएं मांगी थी तुम्हे पाने के लिए
पर न जाने वह फ़क़ीर गायब कहाँ हो गया बिना बताए
सलाह जो तुम मुझे सुना रही हो क्या तुम खुद ऐसा कर पाओगी?
भुला के अतीत को हमारे मेरे बिना तुम मुस्कुरा पाओगी?
जख्म टूटे दिल के न चाहते हुए भी दिख जाते हैं
हम महफ़िल में सरेआम बदनाम हुए फिरते हैं
सपनो की दुनिया में मैं तुम्हें कब का पा चुका हूं
संगमरमर के महल में हमारी निगाह की तस्वीर सजा चुका हूं
©dreamgirl