दुनियाँ की कोई ऐसी हस्ती नहीं,
जो रोक सके हमारे प्रेम की कस्ती को;
अगर हो तुम साथ तो
समंदर के भी सीना चीर देंगे प्रेम के पतवार से!
तेरे हाँथों को पकर कर चलेंगे हाँथों में,
हैसीयत है कहाँ सुनामी को जो रोक सके हमें राहों में;
अगर हो तुम साथ तो
जीवन जलयान के मस्थूल पर,
प्रेम की विजय पताका लहरायेंगे हम खुले आसमानों में!
काँटों से भरे हो जीवन तो क्या,
कोमल-कोमल फूलों से इस पथ को हम सजायेंगे;
अगर हो तुम साथ तो
जीवन उपवन को मधुवन से भी सुन्दर बनायेंगे!
पाँव से लेकर सर तक,प्रेम की गंगा बहाऐंगे,
मोलश्री के फुलों से तेरे दिल का कोना-कोना भहकाऐंगे;
अगर हो तुम साथ तो, सच कहता हूं,
प्रेम के आसियाने को स्वर्ग भी सुन्दर बनाऐंगे!-- अगर---!
-------- संदीप कुमार "संजन"
भगवानपुर,अररिया,बिहार
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