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अजनबी से दोस्ती

ना हम तुम्हें जाने ना तुम हमे
अजनबी है हम ना है आमनेसामने
अन्तरजाल भी है एक युक्ति अनोखी
मीलों दूर होकर भी बन जाती अजीब दोस्ती
करते है गुफ्तगू बेधडक हो कर हम
मस्तानी अदाओं से मनोरंजन पाते हम
नहीं हुए है हम एक दूसरे से रुबरु
मर्यादा से आबाद रखते हर एक कि आबरू
मस्त है यह दिलचस्प रिसता दोस्ती का
ना है कोई गिला-शिकवा या पस्तावा
जिंदगी की एक अनमोल भेट समज कर...
निभाते रहेंगे हम यह रिश्ता अनमोल दोस्ती का...
©hemantjsha